EXCLUSIVE: विराट के साथ अपने रिश्ते पर शास्त्री- 'कैप्टन ही बॉस होता है'
Dileep Premachandran. साल 2016 में जब रवि शास्त्री टीम इंडिया के हेड कोच बनने में नाकाम रहे तो उन्होंने कहा था कि ये ऐसा ही जैसे एक आम के पेड़ को उस वक्त काट डालो जब वो फल देना शुरू करे. अब एक साल कमेंट्री बॉक्स में बिताने के बाद रवि शास्त्री की टीम इंडिया में वापसी हुई है. वर्ल्ड कप 2019 तक के कॉन्ट्रेक्ट के साथ अब शास्त्री और टीम के सामने नई चुनौतियां हैं. आगे साउथ अफ्रीका, इंग्लैंड, न्यूज़ीलैंड और ऑस्ट्रेलिया के दौरे हैं और शास्त्री का मानना है कि इन चुनौतियों को टीम नया इतिहास रचने के अवसर की तरह मानती है.
गॉल टेस्ट के बाद क्रिकेटनेक्स्ट के साथ एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में रवि शास्त्री ने अपनी वापसी और कैप्टन के साथ रिश्तों पर बात की...
आप खिलाड़ियों की कौशलता को कैसे बढ़ा रहे हैं और खिलाड़ी अपने समाधान ख़ुद खोजने के लिए कितने सक्षम हैं?
मैं जो कर रहा हूं उसे मैं कोचिंग नहीं कहता. मैं ये जानता हूं कि मुझे टीम में बतौर कोच रखा गया है लेकिन ये ज़्यादा ट्यूनिंग और प्रबंधन है. ख़ासतौर पर ये कप्तान करता है. यह उस काम में सिर्फ एक विस्तार है. वास्तव में एक अच्छा कप्तान बनने के लिए जिन चीज़ों की ज़रूरत होती है वो यहां मिलेगी.
अगर हम आपके करियर की बात करें तो, सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर दोहरे शतक से लेकर घुटने की चोट की वजह से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से बाहर रहना. एक साल के अंदर ही आपने करियर में बड़ा उतार चढ़ाव देखा. क्या ऐसा तजुर्बा आपको कोचिंग में भी मदद करेगा?
ज़िंदगी में उतार चढ़ाव से हमेशा कुछ सीखते हैं. वो आपको ज़िंदगी का एक नया नज़रिया दिखाता है. जब किसी दुसरे के साथ ऐसा ही होता है तो आप अपने अनुभव से उसकी मदद कर पाते हैं.
टीम इंडिया के ये खिलाड़ी आप पर काफी भरोसा करते हैं. कोच के इतिहास को देखा जाए तो कई ऐसे दिग्गज कोच बने जो फेल हुए क्योंकि उन पर खिलाड़ियों को भरोसा नहीं था.
मैंने हमेशा माना है कि ड्रेसिंग रूम एक मंदिर, चर्च या मस्जिद की तरह होता है. वहां जो होता है वहीं तक रहता है. वो एक ऐसी जगह है जहां आप बतौर खिलाड़ी अपनी दिल की बात कहते हैं, उन मुद्दों पर चर्चा करते हैं जो शायद आप कहीं और नहीं कर पांएगे. और वहां सिर्फ खिलाड़ी ही होते हैं. ड्रेसिंग रूम में एक विश्वास होता है. उसके बिना आप कहीं नहीं जा सकते. एक अच्छे इंसान के गुण यहीं दिखते हैं. बात सिर्फ इतनी है कि आपको वहां बिना किसी एजेंडे के आना होगा. फोकस सिर्फ उसी काम पर जिसके लिए आप वहां आए हैं.
वापस आकर कैसा महसूस हो रहा है?
जब लोग जीत से शुरुआत करने के लिए बधाई देते हैं तो मैं उनसे पूछता हूं कि, कौन-सी शुरुआत? मैं वहीं से शुरू कर रहा हूं जहां छोड़ा था. ये ठीक वैसा ही है जैसे वापस कमरे में आकर आपने पॉज़ बटन को फिर प्ले किया हो...और कुछ नहीं.
क्या इससे मदद मिलती है कि टीम में मूल खिलाड़ी वहीं हैं?
टीम के सभी खिलाड़ी मुझे जानते हैं. अब टीम में एक या दो खिलाड़ी नए हैं, लेकिन वो कोई समस्या नहीं है. कोर टीम वही है, वही टीम जिसका मैं हिस्सा था. 2014 में मैं उस वक्त हिस्सा बना जब टीम बुरे दौर से गुज़र रही थी. मेरे जाने से कुछ ही समय पहले टीम नम्बर वन बनी. टीम बहुत अच्छा परफॉर्म कर रही थी.
आगे कैसी चुनौतियां होंगी, आप उसे कैसे देखते हैं?
ये मेरे जॉब का सबसे अच्छा हिस्सा है. सबसे मुश्किल सीरीज़ आगे आने वाली हैं. लेकिन इस टीम के पास वो करने का मौका है जो कोई और भारतीय क्रिकेट टीम नहीं पाई. वो है- साउथ अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया में सीरीज़ जीतना. इस टीम के पास साधन हैं, सामान है. हमारे पास कमाल के खिलाड़ी हैं. अगर सब कुछ ठीक रहता है तो हम इतिहास रच सकते हैं. पिछली बार जब हम श्रीलंका में थे तो हमें जीत 22 साल बाद मिली. कई दिग्गज भारतीय खिलाड़ी श्रीलंका में सीरीज़ जीतने में नाकाम रहे हैं.
हमें कोच और कैप्टन के रिश्ते के बारे में बताएं...
ये सबसे ज़रूरी काम है. अगर दोनों के बीच कोई बातचीत नहीं है, तो कुछ भी नहीं हो सकता. मेरे लिए ये बहुत आसान है. मैं और विराट एक दूसरे को जानते हैं. इससे पहले भी मैं भारतीय ड्रेसिंग रूम में 18 महीनों के लिए रह चुका हूं. आप अपना किरदार जानते हैं. कैप्टन ही असली बॉस होता है. वह ही टीम को मैदान पर लेकर जाता है. आपका काम है कि जब खिलाड़ी मैदान पर उतरें तो वो अपना बेस्ट करें और अपने आपको अच्छे से व्यक्त कर पाएं. क्रिकेट का ऐसा ब्रैंड बनाए जो निडर हो और साथ ही खेल को एन्जॉए करे. सिर्फ अपने लिए ही नहीं बल्कि उनके लिए भी जो उन्हें देख रहे हैं. आप खुद वहां जाकर बॉलिंग, फील्डिंग या बैटिंग नहीं कर सकते. आपका काम है खिलाड़ियों को तैयार करना. उसके बाद कप्तान अपना काम करता है.
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Source: News18 India
गॉल टेस्ट के बाद क्रिकेटनेक्स्ट के साथ एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में रवि शास्त्री ने अपनी वापसी और कैप्टन के साथ रिश्तों पर बात की...
आप खिलाड़ियों की कौशलता को कैसे बढ़ा रहे हैं और खिलाड़ी अपने समाधान ख़ुद खोजने के लिए कितने सक्षम हैं?
मैं जो कर रहा हूं उसे मैं कोचिंग नहीं कहता. मैं ये जानता हूं कि मुझे टीम में बतौर कोच रखा गया है लेकिन ये ज़्यादा ट्यूनिंग और प्रबंधन है. ख़ासतौर पर ये कप्तान करता है. यह उस काम में सिर्फ एक विस्तार है. वास्तव में एक अच्छा कप्तान बनने के लिए जिन चीज़ों की ज़रूरत होती है वो यहां मिलेगी.
अगर हम आपके करियर की बात करें तो, सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर दोहरे शतक से लेकर घुटने की चोट की वजह से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से बाहर रहना. एक साल के अंदर ही आपने करियर में बड़ा उतार चढ़ाव देखा. क्या ऐसा तजुर्बा आपको कोचिंग में भी मदद करेगा?
ज़िंदगी में उतार चढ़ाव से हमेशा कुछ सीखते हैं. वो आपको ज़िंदगी का एक नया नज़रिया दिखाता है. जब किसी दुसरे के साथ ऐसा ही होता है तो आप अपने अनुभव से उसकी मदद कर पाते हैं.
टीम इंडिया के ये खिलाड़ी आप पर काफी भरोसा करते हैं. कोच के इतिहास को देखा जाए तो कई ऐसे दिग्गज कोच बने जो फेल हुए क्योंकि उन पर खिलाड़ियों को भरोसा नहीं था.
मैंने हमेशा माना है कि ड्रेसिंग रूम एक मंदिर, चर्च या मस्जिद की तरह होता है. वहां जो होता है वहीं तक रहता है. वो एक ऐसी जगह है जहां आप बतौर खिलाड़ी अपनी दिल की बात कहते हैं, उन मुद्दों पर चर्चा करते हैं जो शायद आप कहीं और नहीं कर पांएगे. और वहां सिर्फ खिलाड़ी ही होते हैं. ड्रेसिंग रूम में एक विश्वास होता है. उसके बिना आप कहीं नहीं जा सकते. एक अच्छे इंसान के गुण यहीं दिखते हैं. बात सिर्फ इतनी है कि आपको वहां बिना किसी एजेंडे के आना होगा. फोकस सिर्फ उसी काम पर जिसके लिए आप वहां आए हैं.
वापस आकर कैसा महसूस हो रहा है?
जब लोग जीत से शुरुआत करने के लिए बधाई देते हैं तो मैं उनसे पूछता हूं कि, कौन-सी शुरुआत? मैं वहीं से शुरू कर रहा हूं जहां छोड़ा था. ये ठीक वैसा ही है जैसे वापस कमरे में आकर आपने पॉज़ बटन को फिर प्ले किया हो...और कुछ नहीं.
क्या इससे मदद मिलती है कि टीम में मूल खिलाड़ी वहीं हैं?
टीम के सभी खिलाड़ी मुझे जानते हैं. अब टीम में एक या दो खिलाड़ी नए हैं, लेकिन वो कोई समस्या नहीं है. कोर टीम वही है, वही टीम जिसका मैं हिस्सा था. 2014 में मैं उस वक्त हिस्सा बना जब टीम बुरे दौर से गुज़र रही थी. मेरे जाने से कुछ ही समय पहले टीम नम्बर वन बनी. टीम बहुत अच्छा परफॉर्म कर रही थी.
आगे कैसी चुनौतियां होंगी, आप उसे कैसे देखते हैं?
ये मेरे जॉब का सबसे अच्छा हिस्सा है. सबसे मुश्किल सीरीज़ आगे आने वाली हैं. लेकिन इस टीम के पास वो करने का मौका है जो कोई और भारतीय क्रिकेट टीम नहीं पाई. वो है- साउथ अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया में सीरीज़ जीतना. इस टीम के पास साधन हैं, सामान है. हमारे पास कमाल के खिलाड़ी हैं. अगर सब कुछ ठीक रहता है तो हम इतिहास रच सकते हैं. पिछली बार जब हम श्रीलंका में थे तो हमें जीत 22 साल बाद मिली. कई दिग्गज भारतीय खिलाड़ी श्रीलंका में सीरीज़ जीतने में नाकाम रहे हैं.
हमें कोच और कैप्टन के रिश्ते के बारे में बताएं...
ये सबसे ज़रूरी काम है. अगर दोनों के बीच कोई बातचीत नहीं है, तो कुछ भी नहीं हो सकता. मेरे लिए ये बहुत आसान है. मैं और विराट एक दूसरे को जानते हैं. इससे पहले भी मैं भारतीय ड्रेसिंग रूम में 18 महीनों के लिए रह चुका हूं. आप अपना किरदार जानते हैं. कैप्टन ही असली बॉस होता है. वह ही टीम को मैदान पर लेकर जाता है. आपका काम है कि जब खिलाड़ी मैदान पर उतरें तो वो अपना बेस्ट करें और अपने आपको अच्छे से व्यक्त कर पाएं. क्रिकेट का ऐसा ब्रैंड बनाए जो निडर हो और साथ ही खेल को एन्जॉए करे. सिर्फ अपने लिए ही नहीं बल्कि उनके लिए भी जो उन्हें देख रहे हैं. आप खुद वहां जाकर बॉलिंग, फील्डिंग या बैटिंग नहीं कर सकते. आपका काम है खिलाड़ियों को तैयार करना. उसके बाद कप्तान अपना काम करता है.
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